ठेकेदार का इंतज़ार
ठेकेदार ने कहा था — “गुरुवार को आ जाऊँगा।” गुरुवार आते रहे, जाते रहे, और वो डाल छत के ऊपर लटकी ही रही।
बाराबंकी के मुकेश यादव किसी और के आने का इंतज़ार करते रहे। फिर एक दोपहर पड़ोसी ने बिना माँगे अपनी बैटरी वाली मशीन थमा दी।
पहले वो डाल
मुकेश जी के आँगन में दादा के ज़माने का पुराना पेड़ है। उसकी एक मोटी डाल झुकते-झुकते ठीक वहाँ आ गई जहाँ उसे नहीं होना चाहिए था — छत के कोने के ऊपर, जहाँ बग़ल से बिजली का तार निकलता है और नीचे बच्चों के स्कूल जाने की गली।
फिर ठेकेदार
वो आया, ऊपर देखा, एक भाव बोला। मुकेश जी ने सिर हिला दिया। जाते-जाते बोला: “गुरुवार को आ जाऊँगा।”
पहले गुरुवार फ़ोन उठा — दूसरी साइट पर फँसा हूँ भाई। अगले गुरुवार आदमी नहीं आया। फिर फ़ोन बंद।
ग़ुस्सा ठेकेदार पर नहीं — जहाँ बड़ा काम मिलेगा वहाँ वो पहले जाएगा। ग़ुस्सा उस हालत पर है जिसमें आपका छोटा-सा काम किसी और की मर्ज़ी पर लटका रहता है।
भाव का अंदाज़ा — ये हमारा वादा नहीं। मुंबई-पुणे में नगर निगम में दर्ज ठेकेदार एक पेड़ छाँटने के ₹912 से ₹4,432 तक बोलते हैं — ऐसा बाहर की रिपोर्टों में आया है। भाव जगह-जगह बदलते हैं।
फिर उन्होंने ख़ुद आरी उठा ली
घर में आरी है। सीढ़ी लगाई, चढ़े — और वहीं समझ आया कि लोग ठेकेदार क्यों बुलाते हैं।
ज़मीन पर पड़ी लकड़ी काटना एक बात है — आप बैठ सकते हैं, पैर से दबा सकते हैं। पर सिर से ऊपर, एक हाथ से डाल पकड़कर दूसरे हाथ से आरी चलाना अलग चीज़ है। कंधा जलने लगता है, और डाल टूटते वक़्त किधर मुड़ेगी ये पता नहीं होता। नीचे तार, नीचे गली। मुकेश जी उतर आए — डाल पर हल्का-सा निशान, बस।
यहीं साफ़ कर दें। सीढ़ी पर चढ़कर या सिर से ऊपर काटना किसी भी औज़ार से ख़तरनाक है — आरी हो या मशीन — तार के पास तो और भी। वो डाल मुकेश जी ने जानकार से ही कटवाई। ये मशीन उन कामों के लिए है जो आप दोनों पैर ज़मीन पर रखकर कर सकते हैं।
पड़ोसी की मशीन
उसी दोपहर रामऔतार जी दीवार के ऊपर से बोले — “मेरे पास बैटरी वाली मशीन है, ले जाइए।” छोटी-सी चीज़, एक हाथ में आ जाए। मन में वही ख़याल आया जो शायद अभी आपके मन में है — “ये खिलौना क्या काटेगा।” ऊपर लटकी डाल उन्होंने नहीं छुई; आँगन में गिरी डालों पर मशीन चली।
लौटाते वक़्त उन्होंने एक ही सवाल पूछा: “ये आई कहाँ से?” फ़ोन पर पेज खुला — कैश ऑन डिलीवरी, पैसे सामान आने पर। मुकेश जी इसी पर राज़ी हुए।
ये मशीन किन कामों के लिए है
टहनी, छँटाई, जलावन, बाँस और लकड़ी के तख़्ते — यही उसके product page पर है: branches, logs, bamboo, firewood, planks. और जो इसका काम नहीं है, वो भी कह देते हैं।
“कितनी मोटी लकड़ी काट लेगी?”
उसी काग़ज पर है: 15 सेंटीमीटर मोटा सख़्त लकड़ी का लट्ठा लगभग 10 सेकंड में — और ठीक नीचे उसकी अपनी चेतावनी भी, इसलिए वो भी साथ: ये वक़्त लकड़ी के आकार और सख़्ती से घटता-बढ़ता है। वादा नहीं, अंदाज़ा। और 15 सेंटीमीटर का लट्ठा और उतना ही मोटा खड़ा पेड़ एक चीज़ नहीं — लट्ठा टेक पर टिका रहता है; खड़ा पेड़ किधर गिरेगा ये तजुर्बे वाला बताता है। पेड़ गिराने का औज़ार ये नहीं है।
उसी शीट पर आगे: 48V बैटरी · हाई-पावर ब्रशलेस मोटर · रफ़्तार बदलने वाला ट्रिगर · बिना औज़ार वाला चेन अडजस्टर।
SET INCLUDED में: मशीन, दो हाई-पावर बैटरी, दो चेन, गाइड बार, गाइड प्लेट, चार्जिंग डॉक, कैरी केस, रिंच, पेचकस, मैनुअल।
सेफ़्टी — वैसे ही जैसे पड़ोसी बताता है
खाली हाथ चलती चेन से दूर रखिए — यही असली नियम है। जिस लकड़ी पर कट लग रहा है उसे हाथ से मत थामिए: ईंट लगाइए, टेक लगाइए, या पैर से दबाइए। खाली हाथ या तो पीछे रखिए, या लकड़ी के दूसरे सिरे पर — कट से दूर। चेन लकड़ी में अटके तो मशीन झटके से पीछे, आपकी ही तरफ़ आती है, और चोट वहीं लगती है जहाँ दूसरा हाथ रखा था। मशीन किस हाथ में है इससे नहीं — खाली हाथ कहाँ है, इससे फ़र्क़ पड़ता है। एक हाथ से चलाना इसमें चलता है, उसके product page पर भी यही लिखा है; ध्यान दूसरे हाथ पर रखिए।
दस्ताने और आँखों का चश्मा। बुरादा उड़ता है और सीधे आँख में जाता है।
पैरों में बंद जूते — चप्पल पहनकर मत बैठिए।
ढीले कपड़े, दुपट्टा, गमछा — सब दूर। जो लटक रहा है वो चेन में जा सकता है। आस्तीन चढ़ा लीजिए।
बच्चे दूर, और बच्चे इसे कभी न चलाएँ। मशीन और दोनों बैटरी उनकी पहुँच से हटाकर रखिए।
सीढ़ी पर चढ़कर या सिर से ऊपर मत काटिए। ऊपर का काम जानकार आदमी से करवाइए।
बिजली के तार के आसपास बिल्कुल नहीं — और बारिश में या गीली जगह पर भी नहीं। बैटरी वाली है, फिर भी नहीं।
हर बार शुरू करने से पहले चेन का कसाव और तेल देख लीजिए। ये दोनों बातें उसी स्पेक शीट पर छपी हैं, और नॉब बिना औज़ार के घूम जाता है — बहाना भी नहीं बनता।
पेड़ काटने के नियम हर जगह अलग हैं। टहनी छाँटना अलग बात है, पेड़ गिराना अलग। अपने इलाक़े का नियम एक बार देख लीजिए।
आज की क़ीमत
जो सवाल अक्सर पूछे जाते हैं
बैटरी कितनी देर चलेगी?
चेन ढीली हो गई या उतर गई तो?
₹2,299 में कोई खिलौना तो नहीं आ जाएगा? COD है क्या?
पेट्रोल वाली ज़्यादा पावरफ़ुल होती है ना?
आख़िरी बात
ये मशीन ज़िंदगी नहीं बदलेगी। ये औज़ार है, और हम इसे औज़ार की तरह बेच रहे हैं। पर एक चीज़ ये करती है — बगीचे की छँटाई, गिरी हुई डालों के टुकड़े, जलावन, बाँस: ज़मीन पर खड़े होकर होने वाला ये सारा काम आपके अपने हाथ में आ जाता है। अमरूद की वो झुकी डाल, आँगन में पड़ा डालों का ढेर, चूल्हे के लिए जलावन के टुकड़े, बाड़ के लिए चीरा हुआ बाँस — इन कामों के लिए अब किसी और का दिन तय होने का इंतज़ार नहीं। दस्ताने पहनिए, लकड़ी को ईंट या टेक पर टिकाइए, खाली हाथ पीछे रखिए — और जिस सुबह मन हो, उसी सुबह निपटा दीजिए।
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